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जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा द्वारा पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन कार्य हेतु अमझर शरीफ के खानकाह मोहम्मदिया कादरिया का निरीक्षण

 औरंगाबाद , जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा द्वारा ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत जिले में पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन कार्य से संबंधित हॅसपुरा प्रखंड अंतर्गत अमझर शरीफ स्थित खानकाह मोहम्मदिया कादरिया का निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण जिले के लिए ऐतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ निरीक्षण के दौरान कई दुर्लभ एवं ऐतिहासिक धरोहर सामने आई ।लगभग 1200 वर्ष पुरानी 300 पृष्ठो की हस्तलिखित अरबी कुरान शरीफ लगभग 650 वर्ष पुरानी एक अन्य प्राचीन कुरान शरीफ करीब 300 वर्ष पुरानी अरबी एवं फारसी की सात महत्वपूर्ण पुस्तकें (नैतिक शिक्षा एवं इस्लामी कानून से संबंधित) पैगंबर मोहम्मद से संबंधित मुय-ए- मुबारक (दाढ़ी का बाल) एवं पवित्र पदचिह्न लगभग 1500 वर्ष पुराना हजरत अली का कमरबंद जिस पर कुरान की आयतें अंकित है। काबा शरीफ का गिलाफ (चादर) जिस पर भी पवित्र आयते लिखी हुई है ।इन सभी अमूल्य पांडुलिपियों एवं धरोहरों का विधिवत पंजीकरण किया गया जिसमें उनके संरक्षण एवं अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा यह निरीक्षण 13 वें सज्जादा नशी सैयद शाह हसनैन कादरी खानकाह मोहम्मदिया कादरिया के नाम पर पंजीकृत कराया गया है और खानकाह मोहम्मदिया कादरिया के 13 वें सजादा नशी सैयद हसनैन कादरी के साथ अमझर शरीफ के बड़ी दरगाह में जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा के साथ चादरपोशी की गई जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और यह अपने वतन के अमन शांति के लिए दुआ की गई ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य 75 वर्ष या इससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों चाहे वह कागज ताड़पत्र भोजपत्र कपड़ा या धातु पर लिखे हो का डिजिटाइजेशन कर भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखना है अब तक औरंगाबाद जिले में लगभग 9000 पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है विशेषज्ञ द्वारा सत्यापन एवं संरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी वहीं जिला प्रशासन ने अपील की है कि यदि आपके पास 75 वर्ष या इससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेज सुरक्षित हैं तो उनके डिजिटाइजेशन हेतु जिला कला एवं सांस्कृतिक अधिकारी औरंगाबाद से संपर्क करें और साथी प्रशासन ने श्वसन दिया है कि आपकी पांडुलिपियों पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और आपके स्वामित्व में ही संरक्षित रहेगी डिजिटाइजेशन के माध्यम से आप भी भारतीय विरासत को सहेजने में योगदान दे सकते हैं इस अवसर पर कई वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे जिन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाई आईए अपनी विरासत को सहेजे ज्ञान को आने वाली पीढ़ियां तक पहुंचाएं।

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