डॉ. सूरज मृदुल के जीवन पर केंद्रित अभिनंदन ग्रंथ का लोकार्पण

दिनांक- 24 जुलाई 2025 स्थान – मुजफ्फरपुरडॉ सूरज मृदुल अभिनंदन ग्रंथ समिति के द्वारा साहित्यकार डॉ. सूरज मृदुल के जीवन पर केंद्रित अभिनंदन ग्रंथ का लोकार्पण निजी होटल के सभागार में जाने माने साहित्यकार ,आलोचक डॉ. राम प्रवेश सिंह की अध्यक्षता में पुस्तक का लोकार्पण किया गया।इस अवसर पर शहर के प्रसिद्ध साहित्यकार,कवि कवयित्री और डॉ. सूरज मृदुल से स्नेह रखने वाले साहित्यप्रेमी उपस्थित हुए,
जिसमें सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. संजय पंकज ,वरीय पत्रकार एवं साहित्यकार प्रमोद नारायण मिश्र,जाने माने चित्रकार साहित्यकार गोपाल फ़लक,कवयित्री हेमा सिंह,ग़ज़लकारा सविता राज, पत्रकार प्रेम भूषण, प्रेम प्रकाश उर्फ सोनू जी, मुनींद्र कुमार चौरसिया,स्वदेश कुमार,संजय चौरसिया,राजीव कुमार,विकास कुमार, विजय कुमार,गौरी शंकर,साहित्यप्रेमी रवि कुमार,राकेश कुमार। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने अभिनंदन ग्रंथ पर बोलते हुए डॉ. सूरज मृदुल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अनुकरणीय बताया।सहज सरल व्यक्तित्व के धनी डॉ. सुमन मृदुल अपने अभिनंदन ग्रंथ के माध्यम से नवोदित साहित्यकारों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री से प्रेरित होकर इन्होंने अपने साहित्य के संसार को विस्तार दिया।इस अवसर पर सभी को अंगवस्त्र , प्रतीकचिंह,अभिनंदन ग्रंथ एवं मोती की माला पहना कर सम्मानित किया गया।इस अवसर काव्यपाठ करते हुए डॉ संजय पंकज ने “पागल हुई हवा के कारण जीवन रोता है,कैसे कह दें मन के अंदर क्या क्या होता है”। प्रमोद नारायण मिश्र ने “सावन के महीना में शिव की पूजा करूंगा”। गोपाल फ़लक ने “न कोई कवि हूं,कलाकार नहीं हूं,सविता राज ने “मुझे जाना नहीं है मुफलिसी में ,मिलेगा क्या भला इस बेबसी में”।हेमा सिंह ने मोहब्बत का मेरी असर देखिएगा, इधर देखिएगा,न उधर देखिएगा”। इन सभी ने अपनी ने रचना सुनाकर तालियां बटोरी।आभार ज्ञापन गोपाल फ़लक ने किया।




