अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा स्वर-साम्राज्ञी Asha Bhosle को भावभीनी श्रद्धांजलि

मुम्बई, सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था ‘अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच’ के तत्वावधान में आज एक भावपूर्ण ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया,
जिसमें सुरों की मलिका आशा ताई को काव्यांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम ने साहित्य और संगीत के अद्भुत संगम का रूप धारण करते हुए उपस्थित सभी प्रतिभागियों के हृदय को भाव-विभोर कर दिया।
इस गरिमामय आयोजन की अध्यक्षता डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तंड जी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय श्रीराम राय जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। विशिष्ट अतिथियों में संतोष साहू, शिवपूजन पांडे, पन्नालाल शर्मा, जनार्दन सिंह, जनार्दन शर्मा तथा प्रमेंद्र सिंह जी शामिल रहे। सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधनों में आशा जी के बहुआयामी व्यक्तित्व, उनकी विलक्षण गायन प्रतिभा और भारतीय संगीत जगत में उनके अप्रतिम योगदान को भावपूर्ण शब्दों में स्मरण किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अलका पांडेय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता और श्रद्धा से ओत-प्रोत कर दिया। मंच संचालन का दायित्व अलका पांडेय एवं सुरेंद्र पांडे जी ने संयुक्त रूप से अत्यंत कुशलता से निभाया।
काव्य-पाठ सत्र में कुमकुम सेनगुप्ता, रवि शंकर कोलते, डॉ. अर्चना दुबे ‘रीत’, कौशल किशोर, नीरज ठाकुर, डॉ. पुष्पा तिवारी, सुरेंद्र हरड़े, डॉ. देवीदीन अविनाशी तथा अश्विन पांडेय सहित अनेक कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से आशा ताई को श्रद्धांजलि अर्पित की। विशेष रूप से अलका पांडेय ने आशा जी के लोकप्रिय गीतों की पंक्तियों के साथ कवियों को मंच पर आमंत्रित कर कार्यक्रम में एक अनूठा भावनात्मक आयाम जोड़ दिया।
पूरे आयोजन के दौरान वातावरण आशा ताई की मधुर स्मृतियों से सराबोर रहा। उनकी स्वर-लहरियों की गूंज जैसे हर प्रस्तुति में महसूस की जा रही थी। कई क्षण ऐसे आए जब श्रोताओं और प्रतिभागियों की आंखें नम हो उठीं, और भावनाओं का सैलाब शब्दों के रूप में बह निकला।
यह श्रद्धांजलि सभा न केवल एक स्मरणीय संध्या सिद्ध हुई, बल्कि इसने यह भी सिद्ध कर दिया कि महान कलाकार अपनी कला के माध्यम से सदैव जीवित रहते हैं। आशा ताई के प्रति यह सामूहिक नमन साहित्य और संगीत जगत की एक अनुपम मिसाल बन गया।





