उन्मुक्त उड़ान मंच पर आभासी काव्य गोष्ठी सम्पन्न
आभासी काव्य गोष्ठी के माध्यम से लोक पर्वों की उजास में कविता की उड़ान
प्रमुख लोक पर्व, भाईचारा वे लोग परंपरा को सुदृढ़ करने का प्रतीक, मानवीय मूल्यों से जुड़ने का प्रतीक लोहड़ी और मकर सक्रांति के पवित्र पावन पुनीत अवसर पर उन्मुक्त उड़ान मंच पर आभासी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
मंच की संस्थापिका व अध्यक्षा के संचालन व नेतृत्व में गोष्ठी का शुभारंभ ईश्वरीय प्रार्थना से हुआ
हे लोक पर्व की ज्योति, भास्कर दिनकर की ऊर्जा से
जन जन में कटुता का नाश हो, सौहार्द की उष्मा से उर्जान्वित हो।
मानव मन में सदा सद्भावना का वास हो,
रिश्तों में कृतज्ञता प्रतिबद्धता विश्वसनीयता आत्मीयता और जीवंतता का आभास हो।
हे प्रभु
विपदा आपदा से विश्व को बचाना,
खेत खलियान सदा ही हरे-भरे रखना।
युग युग तक यश फैले हर भारतीय का,
अपनी कृपादृष्टि सब पर बनाए रखना।
काव्य गोष्ठी का आरंभ शिखा खुराना कुमुदिनी लोहड़ी के माहिए
आज लोहड़ी मना लें,
रिश्तों में थोड़ी,
मिठास ही घुला लें से हुआ।
समधुर आवाज़ में लोहडी के संदर्भ में सुनाकर सभी को आनंदित किया।
डॉ फूलचंद्र विश्वकर्मा भास्कर ने
पौष मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय।
भीषण सर्दी के बाद धीरे धीरे ग्रीष्म की ओर।
सशक्त सृजन का परिचय देते हुए समा बाँध दिया।
रेखा पुरोहित तरंगिणी ने बेहद ख़ूबसूरत कविता प्रकृति का पूजन करके हम,
व्यक्त प्रकृति का करते आभार।सुनाकर सराहना पाई। अशोक दोशी दिवाकर ने मनहरण घनाक्षरी व पतंग विषय को लेकर शिक्षा प्रद रचना
उड़ाना मन के अवकाश में ,अलग पतंग अनोखी हो।
सुना कर गोष्ठी को सार्थक किया।
सुरेशचन्द्र जोशी सहयोगी ने त्योहारों की मेहता
त्यौहारों से शिक्षा मिलती, करना दूजे का सत्कार।।बताकर सभी का मन जीत लिया।
विशेष शर्मा “सुहासिनी”ने विभिन्न अलंकारों से अलंकृत रचना
हर आँगन में
ऊष्मा ठहरे,
हर मन में
सकारात्मक परिवर्तन उतरे।
में दार्शनिक भाव का समा वेश कर
तालियां बटोरी।
रीता झा ने बेहतरीन गीत
उत्सव उजास का आया रे,
तिमिर को दूर भगाया रे।
से अपने भावों को स्पष्ट किया।
सरोज डिमरी ने दोनों त्योहारों को विस्तारपूर्वक परिभाषित कर प्रत्येक बिन्दु पर अपनी रचना
नवग्रह मंडल साथ हो, दिनमणि रूप प्रकाश।
सुना कर सभी का मन हर्षित किया।
वीना टन्डन ‘पुष्करा’ने बहुत ही सुंदर रचना
मकर संक्रांति दे शुभ संदेश, समृद्धि, शांति रहे हर देश।
प्रेषित कर अपना अनुभव साझा किया।
नीरजा शर्मा अवनि ने ये संपूर्ण वर्ष के त्योहारों की बात करते हुए अपनी रचना
कलैंडर नववर्ष आगमन,
लग जाती त्योहारों की लड़ी,
शुरुआत मकर संक्रांति से होती,
नई फसल कटने को तैयार खड़ी।
के माध्यम से सभी को प्रसन्न कर दिया।
नीतू गर्ग कमलिनी ने
सूर्य देव की करें उपासना,
मन में भरे भक्ति भावना,
रचना से सबका मन मोह लिया
व ज्योति बरनवाल ने सटीक व सार्थक अभिव्यक्ति से आयोजन को भव्यता प्रदान की।
आभासी काव्य गोष्टी का समापन
कृषकों के श्रम के प्रति कृतज्ञता का भाव
अन्नदाता के प्रति संवेदनात्मक भाव
प्रकृति संरक्षण के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता
जन जन के प्रति गरिमा शान्ति समृद्धि की भावना के साथ सभी का आभार प्रकट किया जिन्होंने अपने भावों की सरिता बहाकर त्योहार के आनंद को दोगुना कर दिया।
भविष्य में भी इसी प्रकार से समय समय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन करने का संकल्प लिया।




