
बसर सहमा हुआ सा है
जौहरी पब्लिशर द्वारा प्रकाशित, ममता तिवारी की नवीनतम पुस्तक “बसर सहमा हुआ सा है” पाठकों के लिए उपलब्ध है। यह एक ग़ज़ल संग्रह है।इस पुस्तक की कीमत 250 रुपये है।
ममता तिवारी ‘मृदुला’ द्वारा रचित गजल संग्रह “_बसर सहमा हुआ सा है_” एक अद्वितीय प्रयास है जिसमें उन्होंने हिंदी और उर्दू की काव्य विधाओं को मिलाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया है। इस संग्रह में गजलों और गीतिकाओं का सुंदर मिश्रण है, जो पाठकों को कविता की विभिन्न शैलियों का अनुभव करने का अवसर प्रदान करता है।
ममता तिवारी ‘मृदुला’ की गजलें प्रेम, विरह, सामाजिक मुद्दों और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित हैं। उनकी रचनाएँ भावनाओं को गहराई से व्यक्त करती हैं और पाठकों को सोचने पर मजबूर करती हैं।
इस संग्रह की विशेषता यह है कि इसमें गजलों के साथ-साथ गीतिकाएँ भी शामिल हैं, जो हिंदी काव्य की एक महत्वपूर्ण विधा है। ममता तिवारी ‘मृदुला’ ने अपनी रचनाओं में गजल और गीतिका दोनों की शैलियों का सुंदर मिश्रण किया है।
“_बसर सहमा हुआ सा है_” एक ऐसी पुस्तक है जो कविता प्रेमियों को जरूर पसंद आएगी। ममता तिवारी ‘मृदुला’ की रचनाएँ न केवल भावनात्मक रूप से समृद्ध हैं, बल्कि वे पाठकों को कविता की विभिन्न शैलियों का अनुभव करने का अवसर भी प्रदान करती हैं।
“बसर सहमा हुआ सा है” एक मार्मिक और विचारोत्तेजक पुस्तक है जो पाठकों को जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। ममता तिवारी की लेखनी ने इस पुस्तक को एक अद्वितीय और प्रभावशाली बनाया है।
पाठकों को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए और इसके माध्यम से जीवन के अनुभवों को समझने का प्रयास करना चाहिए।




