मां को अंतिम भावांजलि

बचपन को यादकर दिल मुझे रुलाया ,
जन्नत की छांव में आंचल की छाया,
जिनके दूध पीकर मैं बड़ा हुआ,
बाहों की अंगुली पकड़ खड़ा हुआ,
घबराहट में व्यथित मन रहा डोल,
मां मेरी और देख कुछ तो कुछ बोल,
ममतामयी मां का उठ गया साया।
तेरी यादें आकर मुझे बहुत रुलाया।
तेरे उदर से निकलकर वसुधा पर आया,
जहां पर तेरे गोद में सब सुख को पाया।
सुबह शाम मैं नजर तुमको देख पाता,
ओझल हो जाओगी बात मुझे रूलाता।
एहसास नहीं मां अब नहीं मिल पाओगी।
सदा सदा के लिए मुझसे रूठ जाओगी,
यादें रह जाएगी जहां ऐसा दिन आया,
तेरा विछोह मेरे अंतर्मन को खूब रुलाया।
महा प्रयाण कर गई अब तुझे नमन।
माता के वियोग में व्यथित हुआ मन।
बात मेरे दिल को बहुत बहुत सताया।
कभी नहीं मिलेगा शीतलता की साया।
मां की मृत्यु के पश्चात उनके प्रति मेरा अपना अंतिम भावांजलि
संतोष कुमार राय ,ग्राम पोस्ट भीरहा ,थाना रोसरा जिला समस्तीपुर, बिहार।




