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रमावती यादव – ‘हिंदी की सेवा और प्रचार ही जिनके जीवन का उद्देश है’

रमावती यादव का जन्म मुंबई (महाराष्ट्र) के एक संस्कारी परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में पूरी की और उच्च शिक्षा भी यहीं से प्राप्त की। उन्होंने एम.ए., बी.एड., और एम.फिल. की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत वर्ष 2000 से वर्तमान तक ‘सोफिया जूनियर कॉलेज’ में हिंदी शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं और हिंदी भाषा और साहित्य की सेवा में पूर्ण लगन से कार्य कर रही हैं।

रमावती जी का स्वभाव अत्यंत कोमल और ममता पूर्ण है, जो उन्हें छात्राओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय बनाता है। वे हमेशा सबके साथ प्रेम और सहानुभूति से पेश आती हैं और अपने इसी कोमल स्वभाव और सादगी से परिपूर्ण जीवन से उन्होंने कइयों के जीवन को प्रेरित किया है। उन्हें सभी छात्रगण अपना आदर्श मानते हैं।

सुश्री रामावती यादव वर्ष 2000 से हिंदी भाषा और साहित्य का अध्यापन कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई से हिंदी विषय में एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की। उनके शोध का विषय ‘जगदंबा बाबू गाँव आ रहे हैं” कहानियों का अनुशीलन’ – चित्रा मुद्गल था। उन्होंने 2008 में MS-ACIT को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। वर्तमान में वे एस. एन. डी. टी. यूनिवर्सिटी मुंबई से हिंदी विषय में पीएच. डी. कर रही हैं।

इन्होंने महाराष्ट्र राज्य जूनियर कॉलेज हिंदी शिक्षक संघ, मुंबई विभाग में सलाहकार के रूप में कार्य किया है। “Divya Baatein” नामक एक शैक्षिक YouTube चैनल की सामग्री निर्माता (Content Creator) एवं संचालिका है, जिसमें महाराष्ट्र बोर्ड के जूनियर कॉलेज के हिंदी पाठ्यक्रम पर आधारित वीडियो उपलब्ध हैं। इस चैनल के 1732K से अधिक सब्सक्राइबर हैं और यह छात्रों के लिए परीक्षा की तैयारी एवं स्व-अध्ययन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है।

वर्ष 2019 में महिला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘महिला भूषण सम्मान’ से सम्मानित किया गया है l 20वें यादव महोत्सव के अवसर पर, उत्तर यादव युवा संघ द्वारा स्थापना वर्ष समारोह में शिक्षण, साहित्य एवं महिला सशक्तिकरण में आदर्श भूमिका के लिए सम्मानित किया गया है। 27–28 मई 2023 को आयोजित संगोष्ठी में महाराष्ट्र राज्य जूनियर कॉलेज हिंदी शिक्षक संघ द्वारा_‘आदर्श शिक्षक पुरस्कार’ — हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु उनको प्रदान किया गया।

रमावती जी ने मारवाडी सम्मेलन संचालित बी. एम. रुइया गर्ल्स कॉलेज एस. एन. डी. टी. महिला विश्वविद्यालय, मुंबई में ‘ ‘अंतर्महाविद्यालय स्वरचित कविता-पाठ प्रतियोगिता’ के लिए निर्णायक’ की भूमिका निभाई है।

सम्मेलन, संगोष्ठी एवं कार्यक्रम में भी इन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है जैसे कि हिंदी विभाग एवं राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (RUSA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम में भाग लिया, जिसका विषय था “साहित्य के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएँ (संवाद, पटकथा लेखन एवं अनुवाद कला)”। महाराष्ट्र राज्य जूनियर हाई स्कूल हिंदी शिक्षक संघ, मुंबई के कार्यक्रम में समन्वयक के रूप में भी इन्होंने भाग लिया , विषय था—“क्या भारतीय मीडिया की भूमिका लोकतंत्र के लिए लाभदायक है?” साथ ही इन्होंने महाराष्ट्र राज्य जूनियर हायस्कूल हिंदी शिक्षक संघ द्वारा छत्तीसगढ़ विभाग की ओर से आयोजित हिंदी व्याख्यान में भाग लिया।

रमावती जी को पढ़ना, लिखना, घूमना, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई में रुचि है। वे हमेशा अपने छात्रों के साथ जुड़ने और उन्हें प्रेरित करने के लिए तत्पर रहती हैं।

हिंदी भाषा हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। रमावती जी का जीवन और कार्य हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पण और प्रेरणा का एक आदर्श उदाहरण है। उनके योगदान को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि वे हिंदी साहित्य की एक प्रेरणा हैं और उनकी सेवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

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