राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच द्वारा पर्यावरण बचाओ कविता संकलन का वर्चुअल विमोचन

औरंगाबाद 30/8/25
राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्था राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच के तत्वावधान में पर्यावरण बचाओ कविता संकलन पुस्तक का वर्चुअल विमोचन किया गया। प्रसिद्ध कवि डॉ राजेश तिवारी मक्खन के अध्यक्षता में आयोजित विमोचन समारोह का संचालन संस्था के संस्थापक, दर्जनों पुस्तकों के रचयिता एवं संपादक श्रीराम राय द्वारा किया गया। वर्चुअल विमोचन में मुख्य अतिथि के रूप में मुल्क राज आनंद की गरिमामई उपस्थिति रही।गीता पांडेय अपराजिता द्वारा सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई।अजय बैरागी विरक्त ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में पर्यावरण की जटिल समस्या को निराकरण के लिए इस तरह की पुस्तकों की अत्यंत आवश्यकता थी।सहाना प्रवीण शान जो राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच के सभी कार्यक्रम में विशेष भूमिका निभाती हैं उन्होंने कहा कि पर्यावरण का मुद्दा जब साहित्यकार लोग समाज के सामने रखते हैं तो उसके मायने बढ़ जाते हैं। पर्यावरण आज जटिल समस्या बन चुकी है डॉ संजीदा खानम ने कहा कि यदि सभ्यता को बचाना है पर्यावरण की रक्षा जरूरी है ।सुनील कुमार खुराना नकुड ने कहा कि आज सारी दुनिया पर्यावरण के झंझावात से त्रस्त है।उसकी रक्षा हम सभी साहित्यकारों की जिम्मेवारी है। भेरू सिंह चौहान तरंग ने इस किताब की सराहना करते हुए कहा कि इस किताब में जिस तरह से पर्यावरण पर उत्कृष्ट कविताएं रची गई है वह भविष्य में एक आयाम स्थापित करेगी। पेंटर दिनेश चंद्र यादव ने इस किताब के रचनाओं को विचार क्रांति का आयाम बताया।विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि इसके माध्यम से कवियों की आवाज को वैश्विक स्वरूप के सदृश्य पर्यावरण संरक्षण में महती भूमिका होगी। गोवर्धन लाल बघेल ने अत्यंत रोचक भाव में पर्यावरण संरक्षण की चर्चा की।हरमिंदर कौर ने कहा कि यह कविता संकलन पर्यावरण की सुरक्षा में मिल का पत्थर साबित होगी। मोहनलाल भंसाली ने विमोचन समारोह में अपनी जोरदार आवाज में कहा कि यह पहली पत्रिका है जिसने पर्यावरण को काव्यात्मक रुप से सजाकर गेयतापूर्ण बनाया है।आसू कवि के रूप में चर्चित रामनिवास तिवारी ने कहा कि पर्यावरण बचाओ वर्तमान समय की मांग है । सुरेश विद्यार्थी ने कहा कि इस काव्य संकलन में रचनाकारों की रचनाएं भाव विभोर करने वालीं हैं। राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच द्वारा सामाजिक सांस्कृतिक एवं जनहित की समस्याओं को मुख्य भूमिका लेकर जिस तरह से पत्रिकाओं का रचना की जा रही है वह भविष्य में साहित्यिक क्रांति लाने वाला कार्य श्री राम राय ने जो बीड़ा उठाया है।एक विशिष्ट साहित्यिक प्रयोग है जो नवोदित रचनाकारों के लिए कम समय में बहुत कुछ सीखने का मौका प्रदान करता है स्थानीय स्तर पर उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्लेटफार्म पर जाने का मौका मिलता है।




