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लोकतंत्र में मतदान का महत्व – निलेश वर्मा

लोकतंत्र वह व्यवस्था है जिसमें जनता स्वयं अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है—मतदान। मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का उत्तरदायित्व भी है।

 

     जब हम वोट देते हैं, तो हम अपने देश की दिशा और भविष्य तय करते हैं। हमारा एक-एक वोट मिलकर सरकार बनाता है और समाज को आगे बढ़ाता है। इसलिए यह सोचना गलत है कि “मेरे एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा।” वास्तव में, हर वोट की अपनी अहमियत होती है। आज भी कई लोग मतदान के दिन इसे गंभीरता से नहीं लेते। कुछ लोग इसे छुट्टी का दिन समझते हैं, तो कुछ लोग उदासीन बने रहते हैं। कुछ तो कहते हैं की “मेरे एक वोट से क्या ही फर्क पड़ेगाI” कुछ कहते हैं “कतार में क्यों लगेI” लेकिन ऐसा करना लोकतंत्र को कमजोर करता है। एक मजबूत लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक लोग मतदान करें।

 

   मतदान हमें समानता का अधिकार देता है। यहाँ हर व्यक्ति का वोट बराबर होता है—चाहे वह अमीर हो या गरीब। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता है।

 

    मतदान के महत्व को दृष्टि में रखते हुए भारत सरकार ने 61वें संविधान संशोधन अधिनियम 1988 के तहत मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी ताकि देश के अधिक से अधिक युवा मतदान कर सके और अपना प्रतिनिधि का चयन कर सके I युवा शक्ति की भागीदारी से ही लोकतंत्र को नई दिशा और ऊर्जा मिलती है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 326 हमें मतदान का अधिकार प्रदान करता है और हमें हर हाल में इसका पालन करना चाहिए I

 

      अतः हमें चाहिए कि हम अपने मताधिकार का सही उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। एक जागरूक नागरिक ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान और नींव होता है।

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 निलेश वर्मा

शिक्षण संस्थान – बंगबसी ईवनिंग कॉलेज (कलकत्ता विश्वविद्यालय)

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