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समीक्षा- श्रीसत्य माधुरी काव्य संग्रह

श्रीसत्य माधुरी काव्य संग्रह… दीपनारायण झा “दीपक” जी की काव्य संग्रह की समीक्षा।

समीक्षक

डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’

प्रयागराज

 

सरल, सहज ,बहुमुखी प्रतिभा के धनी कवि दीप नारायण झा ‘दीपक’ जी का “श्रीसत्य माधुरी” शानदार काव्य संग्रह है । यह प्राची डिजिटल पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ है। पुस्तक का मूल्य ₹300 है। आवरण सज्जा खूबसूरत है । विषय सूची व्यवस्थित ढंग से बनी है ।

रचनाओं की शुरुआत मां सरस्वती से शुरू होकर मनहरण घनाक्षरी पर समाप्त हुई है।

मां सरस्वती दे मुझे, कुछ ऐसा वरदान

मैं हूं बालक आपका, बिल्कुल ही नादान ।

इसके बाद भोले बाबा ,गणपति वंदना की गई है। हम खुशी से सुनाने लगे ,जोगीरा ,वैद्यनाथ सरकार आदि एक से बढ़कर एक कविताएं हैं। हर कविता एक नया संदेश देती है । आपने अपनी कविताओं में भावनात्मक प्रदर्शनों को कुशलता से चित्रित किया है। “चिड़िया बैठी डाल पर, लिए चिड़े का साथ

चू – चू ची -ची बोलती ,आपस में हर बात ।

आपके काव्य संग्रह में घनाक्षरी, रोला, कुंडलिया दोहा, चौपाई ,छंद का समावेश है । अनेक विधाओं में रचित कविताओं का बहुत सुंदर काव्य संग्रह है।

दोहा गीतिका–

पल पल बीता जा रहा ,बीत रहा वर्ष

जाने है किस बात, मन में इतना हर्ष ।

एक और देखिए

मनमानी किसकी चली, सभी हुए हैं फेल

चलता रहता है यहां ,जीवन भर का खेल।

आपकी रचनाएं भावपूर्ण ,बहुआयामी हैं। भाव प्रधान और विविध विधाओं में निपुणता दर्शाती है।

“भावी जननी है बेटी

इसे मत रोको जनने से

भ्रूण हत्या बड़ा पाप है

इसको रोको आज से।

सुहागन ,बुलंदी ,वादा ,सावन ,बगावत ,दीपक, रावण, हुंकार ,मानवता ,दीपबत्ती,उड़न खटोला ,बसंत, रोटी आदि कविताएं सरल, सहज तरीके से पाठकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। रचनाओं के शीर्षक बहुत सुंदर हैं। कविताओं में एक प्रवाह है । कम शब्दों में आपने सारगर्भित बात कही है।

श्री सत्य माधुरी काव्य संग्रह सुंदर भावबोध व शिल्प सौंदर्य से युक्त आपका सृजन.…. साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर है। मैं प्रस्तुत काव्य संग्रह की सफलता की कामना करती हूं ।

आदरणीय दीप नारायण झा ‘दीपक’ जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं….श्री सत्य माधुरी काव्य संग्रह नए आयाम गढ़े.. ऐसी मेरी कामना है।

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