होली भीड़हा गांव की

भीड़हा, अपने आप में एकल नहीं बहुसंख्यक समाज का नेतृत्व करने वाला गावो का गांव है, यहां जाति पाति, उच्च नीच, किसी प्रकार भेदभाव नहीं रहता है, होली इसी का पर्यायवाची है। यह पर्व सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बिंदु है। इस गांव में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कृष्ण बल्लभ सहाय, कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्र, बिंदेश्वरी दुबे, चंद्रशेखर सिंह , समाजवादी नेता, रामानंद तिवारी, मधुलिय मय, जॉर्ज फर्नांडिस, राज नारायण, साहित्यकारों में राष्ट्रकवि दिनकर, कलेक्टर सिंह केसरी, आरसी प्रसाद सिंह सुरेंद्र झा सुमन चंद्रभानु सिंह, मिथिला और मैथिली मंच के बहुत व्यापक हस्ती सब, गांव में आकर अपने आप में सुखद अनुभूति का आनंद प्राप्त किया। शिक्षा प्रगति एवं धन संपदा से संपन्न सामाजिक जीवन व्यापक रूप से समाज के हित में काम करने वाला नीति नीयत एवं विचार मजबूत होता रहा। राजनीतिक हस्ती में स्वर्गीय बालेश्वर राम राम भगत पासवान रामसेवक हजारी गजेंद्र प्रसाद हिमांशु जी, स्वर्गीय रामविलास पासवान रामचंद्र पासवान , हिमांशु जी को छोड़कर शेष सभी लोग अब इस दुनिया में नहीं है, उनका व्यापक संबंध समाज से रहा। पूर्व विधायक अशोक कुमार मुन्ना, पूर्व विधायक मंजू हजारी, अशोक कुमार और वर्तमान विधायक आदरणीय वीरेंद्र कुमार व्यक्ति नहीं समाज से रहा। रोसरा की गरिमा ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहा है। इसके प्रनेता रहे हैं, पूर्व मुखिया रहे, स्वर्गीय राम सुदिष्ठि राय, स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण राय, स्वर्गीय योगेंद्र नारायण राय, स्वर्गीय रामविलास राय, और वर्तमान पीढ़ी में पूर्व मुखिया संजीव कुमार राय, पूर्व मुखिया घनश्याम राय, पूर्व मुखिया पूनम देवी और वर्तमान में मुखिया श्रीमती सुनैना देवी , पूर्व और वर्तमान पीढ़ी अपने पूर्वजों के प्रतिष्ठा धरोहर को संबल प्रदान करते हुए सशक्त और मजबूत करने का काम किया। राजनीतिक क्षितिज पर पूर्व विधायक और मंत्री स्व सहदेव महतो, पूर्व विधायक स्व रामाकांत झा, स्वर्गीय महावीर रावत, स्वर्गीय रामाश्रय राय बच्चा बाबू, विधान परिषद सदस्य स्वर्गीय राम बहादुर राय और स्वर्गीय वृंदा प्रसाद राय वीरेंद्र का उचित मार्गदर्शन एवं सानिध्य हमारे समाज को गरिमामय प्रतिष्ठा बढ़ाया और उनके मार्गदर्शन में हम आज भी प्रेरणा के स्रोत को आहुति के लिए संलग्न किए हुए हैं। हाई स्कूल कॉलेज एवं स्वास्थ्य केंद्र समाज के ऊपर और समाज के लिए तथा समाज के हित में अपने प्राचीन एवं वर्तमान गौरव गाथा को समाहित किए हुए हैं। हमें गर्व है जो हम भीरहा वासी हैं, लोकसभा या विधानसभा चुनाव होता है, चारो बगल का चुनावी हवा, भीरहा से निकाल कर बहता हुआ अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचता है। यह एक गांव नहीं गांवो का समूह है। स्वर्गीय रामचंद्र पासवान जी, इस गांव को महत्व देते रहे और इस गांव की जनता भी अपने सर के ऊपर इन्हें रखता रहा, प्रणाम उनके राजनीतिक पराभव प्रभावकारी रहा। जो लोग नेतृत्व को नहीं समझते और प्रकृति परिणाम को नहीं समझते, ऊपर ऊपर चलते, नीचे धरती उनको खाई के रूप में रहता है। यहां के लोगों के बीच में सम्मान प्रतिष्ठा सबसे मजबूत करी है, जिस नेता के माध्यम से यह प्राप्त होता रहा और यहां के नेतृत्व को नजर अंदाज नहीं करता रहा, वह मजबूत और सशक्त रहा। एक सांसद मिनिस्टर विधायक के रूप में आदरणीय महेश्वर हजारी जी का भी लगाव हमारे गांव समाज से अंतर भाव से रहा। इस क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी का आरंभ एवं उन्नयन का केंद्रीय बिंदु डॉ रामविलास राय रहे। पूर्व प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री एवं वर्तमान एनटीपीसी के स्वतंत्र निदेशक आदरणीय सुशील चौधरी जी का ननिहाल हमारा गांव है और इनका लगाव गहरा है। वर्तमान स्थिति में रोसरा का विकास एवं मार्गदर्शन रोसरा प्रखंड के प्रखंड प्रमुख पूज्य उषा देवी के कुशल नेतृत्व में प्रगति का पथ प्रशस्त कर रहा है। हमारा गांव हमारा समाज बहुसंख्यक जनता के जनभावना के अनुकूल समाज के आधार स्तंभ को स्थायित्व प्रदान करता है। जो भी जनप्रतिनिधि या जन नेता, इस गांव के नेताओं के साथ समाज के हर एक वर्ग के साथ अपना प्रेम और स्नेह दिया, उसके पीछे जाति नहीं जमात खड़ा रहता है। यहां के नेतृत्व करने वाले स्थानीय नेताओं का छवि सामाजिक जीवन के परिकल्पना पर प्रतिस्थापित है। यह गांव इतिहास वर्तमान और भविष्य का प्रेरणा के प्रतिबिंब पर प्रतिस्थापित है। जो यहां से छोड़कर चलता है और उसकी यात्रा अधूरी रह जाता और वह कहीं ना कहीं छूट जाते हैं। समानता और बहुलता पर केंद्रित गांव, मेरे लिए जन्मभूमि के रूप में पूजनीय है। अपने पूर्वजों एवं वर्तमान पीढ़ी और आने वाले भविष्य का आधार पुंज गांव, सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत पर अपना अमित छाप छोड़े हुए हैं। नीलमणि की बगिया का हम एक पुष्प है और यह पुष्प कभी मुड़झाता नहीं, बसंत विद्यमान रहे और प्राचीन वर्तमान और आने वाला कल सुखद स्मृति एवं प्रभावकारी हो। यही आकांक्षाओं के अनुरूप हमारा गांव हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत। इस मिट्टी में पले बड़े हुए, अपने जीवन को जन सेवा में केंद्रित किया, इस मिट्टी का हर एक लाल अपना जीवन ऊंचाइयों पर प्रतिस्थापित करता रहेगा। जय मातृभूमि, जय भीरहा, जय रोसरा और जय बिहार, जय भारत।


