जीवन में परिवार का महत्व

परिवार का शाब्दिक अर्थ “चारों ओर से ढका हुआ” (पर +आवरण) या “जिससे हम ढंके हुए हों” होता है। यह विवाह, रक्त संबंध या गोद लेने के माध्यम से जुड़े लोगों का एक समूह है, जो एक साथ रहते हैं और भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इसे समाज की मूलभूत इकाई माना जाता है। परिवार समाज की आधारभूत इकाई है,जो प्रेम, सुरक्षा और संस्कार प्रदान कर व्यक्ति के जीवन को पूर्णता देती है। यह भावनात्मक सहारा, मूल्यों की शिक्षा और कठिन समय में ढाल बनकर, शारीरिक व मानसिक विकास के लिए एक सुरक्षित वातावरण (पाठशाला) सुनिश्चित करता है।
परिवार के महत्व के प्रमुख बिंदु ~
1. भाावनात्मक और सामाजिक आधार ~ परिवार प्यार, अपनापन और मानसिक समर्थन का मुख्य स्रोत है, जो एकाकीपन को दूर करता है। मूल्यों और संस्कारों की का जन्म परिवार में ही होता है| हर परिवार का अपना एक अलग मूल्य और संस्कार होते हैं |
2. पाठशाला ~ परिवार में ही बच्चे नैतिकता, सम्मान, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे मानवीय गुण सीखते हैं।
3. सुरक्षा और स्थिरता ~ यह जीवन के सभी पड़ावों पर, विशेषकर संकट के समय में सबसे बड़ा सहारा होता है।
4. सांस्कृतिक विरासत ~ परिवार पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक और नैतिक मानदंडों (परंपराओं) का हस्तांतरण करता है।
अतः हम कह सकते हैं कि परिवार से ही हमारा अस्तित्व है और परिवार ही एक-दूसरे को बांध कर रखता है अर्थात् परिवार के बिना ना हमारा अस्तित्व है और ना ही हम है | परिवार में रहने से ही सभी एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं| हर त्योहार को एक साथ मनाते हैं इससे अकेलेपन का एहसास नहीं होता है| जब भी कोई मुसीबत पड़ती है तो सब साथ देने के लिए तैयार रहते हैं| परिवार इसी एकता और मिलकर रहने का नाम है इसलिए हम सब यह प्रतिज्ञा करें कि आज के इस आधुनिक अर्थात बौद्धिकतावादी युग में हम परिवार के साथ रहे और सभी का ख्याल रखें| आप सभी को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
✍️डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी
(अतिथि प्राध्यापिका)
हिंदी विश्वविद्यालय
हावड़ा, पश्चिम बंगाल




