हिंदी साहित्य की उभरती हुई प्रतिभा : नाहिदा शेख

नाहिदा गुलामदस्तगीर शेख एक प्रतिभाशाली शोधार्थी हैं जो हिंदी साहित्य में अपनी पहचान बना रही हैं। उनकी मातृभाषा मराठी और हिंदी है, और उन्होंने हिंदी साहित्य में निबंध लेखन और लेख लिखने का कार्य विद्यालयीन जीवन में ही किया है। जिसमें ‘शहीद भगतसिंह’, ‘जीवन’ और ‘नारी के बढ़ते कदम’ प्रमुख रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
नाहिदा शेख की स्नातक की पढ़ाई श्रीरामपुर में पूर्ण हुई और उन्होंने अहमदनगर में स्नातकोत्तर की पदवी प्राप्त की। वर्तमान में, वह एस.एन.डी.टी महिला विश्वविद्यालय, मुंबई में शोधार्थी हैं। उन्होंने हिंदी पंडित, हिंदी पद्म और हिंदी अनुवाद में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जो उनकी प्रतिभा और कड़ी मेहनत का प्रमाण है।
नाहिदा शेख के आदर्श उनके पिताजी हैं। उनके विचारों ने उन्हें आगे बढ़ने और सकारात्मक बदलाव लाने में प्रेरित किया है। उन्होंने भाईचारे और नैतिकता पर जोर दिया है और शिक्षित बनने, संगठित रहने और संघर्ष करने को अपनाया है। पिताजी के मृत्यु के बाद पति के साथ ने इन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया। पारिवारिक जिम्मेदारियां और संघर्ष का सामना करते हुए आज उनका सफर यहां तक उन्हें अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है।
नाहिदा शेख का शोध कार्य स्त्री की आत्मवेदना और उसके संघर्ष को जनमानस तक पहुंचाने पर केंद्रित है। उनका उद्देश्य महिलाओं के प्रति सम्मान बढ़ाना और समाज व्यवस्था में बदलाव लाना है।
नाहिदा शेख ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। जिसमें ‘समकालीन हिंदी साहित्य में दलित विमर्श’, ‘हिंदी साहित्य में दलित स्त्री: दशा और दिशा’, ‘हिंदी आत्मकथा साहित्य में दलित विमर्श’, ‘हिंदी साहित्य में नारीवादी आलोचना’, ‘दलित साहित्य का परिचय’ और ‘हिंदी पत्रकारिता का उद्भव और विकास’ प्रमुख हैं। उनकी कविताएं ‘चंद आंसू’ और ‘आखिर क्यों?’ ‘बेटी बचाओ’ राष्ट्रीय साझा साहित्य संग्रह में प्रकाशित हो चुकी हैं।
उन्हें कई प्रमाण पत्र भी प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय वेबीनार, सेमिनार और कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता निभाई है। भोजपुरी साहित्य विकास मंच की उपइकाई ‘भारतीय भाषा शोध संस्थान’ (कोलकाता) द्वारा उन्हें ‘हिंदी साहित्य में दलित विमर्श’ पर आयोजित संगोष्ठी में संचालन का कार्य करने का अवसर मिला है। और इसी संस्थान द्वारा उन्हें ‘हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष (1826 – 2026): चुनौतियां और संभावनाएं’ पर आयोजित संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया भी गया है।
नाहिदा शेख का लक्ष्य शोधार्थी के रूप में साहित्य और शिक्षा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना है। वह स्त्रियों के अतीत पर विचार करना और वर्तमान में घटित हो रही घटना पर विचार करना चाहती हैं। वह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम करना चाहती हैं।



