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” गजल “

“गजल ”
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लक्ष्य जीने का मुझे दिखला गई,
एक सूरत वो जो दिल को भा गई ।।
बाद तेरे जिंदगी फिर जाने क्यों,
इक पहेली सा मुझे उलझा गई ।।

उसको आना ही नहीं था पर ये क्या ?
आँख उसकी ताक में पथरा गई ।।

सारे रिश्ते मतलबी इस दौर के,
जिंदगी इतना मुझे समझा गई ।।

आ गई माली के ही पैरों तले,
इक कली खिलते ही कल मुरझा गई ।।

सच की राहों पर कठिन चलना बहुत,
सच ” सखी ” दुनिया को ये बतला गई ।।

डॉ. अंजना सिन्हा “सखी ”
रायगढ़, छत्तीसगढ़

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