न्यूज

भूमंडल की अनुपम रचना- माँ पुस्तक का ऐतिहासिक लोकार्पण

  • ‌‌*भूमंडल की अनुपम रचना- माँ पुस्तक का ऐतिहासिक लोकार्पण*

लेखिका कुसुम लता पुंडोरा ‘कुसुम’ की तीसरी पुस्तक “भूमंडल की अनुपम रचना- माँ” जैसा कि नाम में ही सृष्टि समाहित है ऐसी पुस्तक का लोकार्पण, रविवार दिनांक 03 मई, 2026 को निर्माण विहार, दिल्ली के एस एस एस स्टूडियो, में देवप्रभा प्रकाशन, गाजियाबाद के बैनर तले बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
पुस्तक का लोकार्पण विश्व स्तरीय श्रेष्ठ लेखिका डॉ सविता चड्ढा की उपस्थिति के साथ श्री अनिल मीत, वरिष्ठ ग़ज़लकार, डॉक्टर चेतन आनंद , कवि, प्रकाशक, पत्रकार, डॉ मनोज कामदेव, सुप्रसिद्ध दोहाकार, डॉ अशोक कुमार मयंक, वरिष्ठ साहित्यकार, चिकित्सक, कंचन वार्ष्णेय ‘कशिश’, संस्थापिका,अध्यक्ष,कशिश काव्य मंच के करकमलों से किया गया ।
पुस्तक विमोचन के शुभ अवसर पर कुसुम लता पुंडोरा का परिवार भी इस गौरवशाली लोकार्पण में मंच पर उपस्थित रहा।
कार्यक्रम का संचालन कुशल, निपुण, उत्कृष्ट संचालिका, श्रेष्ठ कवयित्री राजरानी भल्ला के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रजनी बाला ‘सहज’ की गणेश वंदना से किया गया तत्पश्चात कुसुम लता ‘कुसुम’ ने सरस्वती वंदना से माँ सरस्वती का आह्वान किया।
मंचासीन आमंत्रित अतिथियों का स्वागत सत्कार कुसुम लता पुंडोरा ‘कुसुम’ के द्वारा अंग वस्त्र, मुक्ताहार व मोमेंटो भेंट करके किया गया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉक्टर सविता चड्ढा ने कहा
लेखक के शब्द,उसका सृजन उसकी अंतर्मन का आलोक और उसकी आत्मा का रस होता हैं। उसके भावों का सतरंगा समुद्र जब शब्दों के द्वारा लहराता है तब पूरा विश्व उसके रंग में रंग जाता है, ये सब भूमंडल की अनुपम रचना “माँ ” को पढ़कर महसूस हुआ। लेखों और दोहों से सुसज्जित इस पुस्तक के शब्द व भावना अनुकरणीय हैं।

कार्यक्रम में लगभग पैंतीस रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। सभी उपस्थित रचनाकारों का सम्मान भी अंग वस्त्र और मुक्ताहार से किया गया ।
कार्यक्रम में कुछ श्रोता,दर्शकगण व मीडिया जतिन भारतीय न्यूज के पत्रकार भी उपस्थित रहे।
लोकार्पण कार्यक्रम बहुत ही शालीन व गरिमापूर्ण रहा, उत्कृष्ट और शानदार तरीके से संपन्न हुआ ।
यह पुस्तक वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नैतिक मूल्यों के उत्थान व संस्कारों का बखान करते हुए जीवन में माँ की महिमा व माँ के विभिन्न रूपों पर प्रकाश डालकर पाठक वर्ग को चिंतन मनन के लिए बाध्य करेगी।
माँ की हमारे जीवन में भूमिका संग कर्तव्य व संतान का माँ प्रति कर्तव्य तथा विद्रूपताओं को भी लेखिका ने इस पुस्तक में संजोने का प्रयास किया है।
अंत में स्वादिष्ट भोजन की उत्तम व्यवस्था व पुस्तक परिचर्चा वार्ता के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button