वाग्दत्ता परिवार द्वारा ग्राम भुगवारा मे काव्य गोष्ठी का आयोजन

करेली..नगर की सामाजिक साहित्यिक संस्था वाग्दत्ता साहित्य समिति द्वारा गत दिवस साहित्यिक उपक्रम के तहत ग्राम भुगवारा स्थित श्रीमती ज्योति – संध्या दुबे के निवास स्थान पर काव्य गोष्ठी का आयोजन नगर के वरिष्ठ गीतकार दादा बाबूलाल दुबे, वरिष्ठ साहित्यकार माते कालिदास बघेल प्रेम, शील कुमार दुबे के सारस्वत आतिथ्य में आयोजित हुई। अतिथि सम्मान पश्चात सर्वप्रथम माँ सरस्वती की वंदना आमगांव बड़ा के सुनील नामदेव तन्हा ने प्रस्तुत की तो वहीं बाम्हनबाड़ा से पधारे कवि अनंत स्वामी अंबर ने..गुमसुम क्यों रहती माँ तेरी क्या लाचारी है, मुझे बता क्या मेरी डोली उठने वाली है, बापू का चेहरा भी उतरा उतरा रहता है, अबके बापू ने क्यों कर डाली बड़ी उधारी है..रचना की प्रस्तुति दी। राँकई से पधारे अब्दुल गफ्फार भारती ने तरन्नुम के हवाले से गीत गज़ल की सुरमय प्रस्तुतियाँ दी आपने गज़ल गुनगुनाकर माहौल जमाया। आमगांव बड़ा के सुनील तन्हा ने जीवन की सच्चाई को बयां करती कविता सुनाते हुए हास्य की बयार छोड़ी। युवा हस्ताक्षर अंशुल श्रीवास्तव नादान ने..शोहरत मिलना इतना भी आसान नहीं, दुखड़ो को भी लय में गाना पड़ता है.. गज़ल पेश की। डाँ. दिग्विजय सिंह राजपूत ने माँ नर्मदा की महिमा को भजन के माध्यम से रखा। वरिष्ठ कवियत्री श्रीमती श्रद्धा दुबे ने जबलपुर की चौसठ योगिनी का चित्रण कविता के जरिए रखा। तो आपने..प्रतिम होकर अप्रतिम बोध साकार और निराकार रूप अतुलनीय आभास परब्रम्ह का करा देता है सामीप्य सहज में..प्रस्तुत की। श्रीमती सुधा भार्गव ने सम सामायिक विषयों पर रचना पाठ किया।श्रीमती ज्योति पाठक ने अनूठी कृति माँ पर रचना सुनाई। गोष्ठी का संचालन कर रहे करेली के रचनाकार अमित जैन संजय ने..इस सफर में जिंदगी पत्थर तो देखे हैं बहुत, अब गुजारिश फूलों की बरसात होना चाहिए..गज़ल सुनाकर तालियां बटोरी। जबलपुर से पधारी कवियत्री श्रीमती संध्या दुबे ने दुख में भी खुशी का अहसास होता है..रचना सुनाई। सारस्वत अतिथि नगर के वरिष्ठ कवि शील कुमार दुबे ने जाम अगर ईमान का हो, ताउम्र खुमारी रहती हैं..क्या दर्द कोइ शाम से ईजाद कर लिया, खाली मकान गम से जो आबाद कर लिया, आहट शब ए सुकूँन हुई ख़्वाब गाह से शायद किसी ने फिर से पलट याद कर लिया..गज़ल व मुक्तकों से समां बाँधा। वरिष्ठ साहित्यकार माते कालीदास बघेल प्रेम ने कलुषता विचारों में होती हैं, गंदा वातावरण नहीं होता..कविता की शानदार प्रस्तुति दी। जिले के वरिष्ठ गीतकार 95 वर्षीय दादा बाबूलाल दुबे ने..सुबह शाम हो गई, उम्र तमाम हो गई। दीप का नेह चुका, हवा बदनाम हो गई..गीत गुनगुनाया। इस मौके पर आकाश दुबे, श्रीमती पूजा दुबे, अशोक तिवारी सहित साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही। आभार अंशुल श्रीवास्तव ने जताया।




