न्यूज

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा भव्य सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का सफल आयोजन

मुंबई। अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के तत्वावधान में दिनांक 21 मार्च 2026, शनिवार को सायं 4 बजे एक भव्य सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन बड़े ही गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अभिनंदन तथा गुड़ी पड़वा एवं नवरात्रि के पावन अवसर पर विशेष रूप से आयोजित किया गया, जिसमें नारी विमर्श और साहित्यिक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन अलका पाण्डेय एवं सुरेंद्र हरड़े द्वारा किया गया। शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसे अलका पाण्डेय ने अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।

समारोह की अध्यक्षता आदरणीय श्री राम राय जी (अध्यापक, साहित्यकार एवं कवि) ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वीर कुंवर सिंह मार्तंड (संपादक) की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों में जनार्दन शर्मा (हास्य कवि), संतोष साहू (वरिष्ठ पत्रकार), जनार्दन सिंह, पन्नालाल शर्मा, शिवपूजन पाण्डेय (वरिष्ठ पत्रकार) एवं प्रमेंद्र सिंह (संपादक, द वेस्टर्न ऑब्जर्वर) सहित अनेक गणमान्य साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में लगभग 20 से अधिक कवियों एवं रचनाकारों ने भाग लेकर अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। कुमकुम वेद सेन, शोभा रानी तिवारी, रानी अग्रवाल, पुष्पा गुप्ता, नीरज ठाकुर, ओमप्रकाश पांडे, रविशंकर कोलते, अनीता स्वराज, मीना त्रिपाठी एवं रामेश्वर प्रसाद गुप्ता सहित सभी प्रतिभागियों ने अपने सशक्त काव्य-पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर मंच की अध्यक्ष अलका पाण्डेय द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का सम्मान-पत्र भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम की विशेषता रही कि यह अग्निशिखा मंच की 517वीं काव्य गोष्ठी थी, जो संस्था की निरंतर साहित्यिक सक्रियता और समर्पण को दर्शाती है।

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच एक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था है, जो विगत कई वर्षों से साहित्यकारों, लेखकों एवं कवियों को मंच प्रदान कर उन्हें नई पहचान दिलाने का कार्य कर रही है। संस्था द्वारा वर्षभर विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा मिलती है।

कार्यक्रम के अंत में नीरजा ठाकुर ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

इस सफल आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि साहित्य समाज को जोड़ने और संवेदनाओं को जागृत करने का सशक्त माध्यम है।

कुछ कवियों की रचनाओं की चंद लाइनें

 

स्त्री-विमर्श की कविता—जहाँ पीड़ा भी है, प्रश्न भी, और आत्मसम्मान का उद्घोष भी।

 

*मैं स्त्री हूँ*

 

 

मैं स्त्री हूँ—

कोई परंपरा की गठरी नहीं

जो पीठ पर लाद दी जाए,

न ही कोई मौन प्रतिमा

जिसे सजा कर

पूजा के बाद भुला दिया जाए।

मेरे हाथों में

सिर्फ़ चूड़ियाँ नहीं,

मेहनत की लकीरें भी हैं,

मेरी आँखों में

काजल के साथ

सपनों की आग भी है।

मुझसे कहा गया—

सहन करो,

समझौते को श्रृंगार बनाओ,

अपमान को मर्यादा कहो,

और चुप्पी को

स्त्रीत्व का गहना मानो।

पर कब तक?

जब निजता छीनी गई,

तो सवाल जन्मा—

क्या मेरा शरीर भी

सामूहिक संपत्ति है?

जब निर्णय मुझसे छिने गए,

तो चेतना ने पूछा—

क्या मेरी इच्छाओं का

कोई मूल्य नहीं?

मैंने रिश्ते निभाए,

पर स्वयं को नहीं छोड़ा।

मैं झुकी—

पर टूटी नहीं।

मैं रोई—

पर खामोश नहीं रही।

एक दिन

मैंने भय से कहा—बस।

और साहस से कहा—अब।

मैं निकली

अनुमति की नहीं,

अधिकार की राह पर।

जहाँ प्रेम

बंधनों में नहीं,

सम्मान में साँस लेता है।

आज मैं कहती हूँ—

मैं किसी की छाया नहीं,

अपना पूरा आकाश हूँ।

मैं त्याग की परिभाषा नहीं,

चयन का साहस हूँ।

मैं स्त्री हूँ—

और मेरी कथा

अब केवल सहन की नहीं,

स्वाभिमान की इतिहास है।

डा अलका पान्डेय मुंबई

 

नारी तू हारने वाली नहीं हराने वाली है

 

तू रिश्तो को सिखाने वाली है

हर वक्त तू एक पुल बनती है

कुमकुम वेद सेन

नारी विमर्श की कविता

नारी ही माँ है, बहन है

पुत्री है और एक प्रेयसी भी

अंतर संबंध का है

समाज के हवित्री में

नारियाँ नहीं जलायी जाती

जलता संबध है।

डॉ पुष्पा गुप्ता

मुजफ्फरपुर बिहार

 

*चैत्र नवरात्रि*

 

*गुड़ी पड़वा*

पर कविता

नव संवत्सर का शुभ प्रभात, उमंगों का संदेश लाया,

गुड़ी पड़वा का पावन पर्व, जीवन में नव प्रकाश लाया।

जनार्दन शर्मा

 

तुम्हारा हाथ अगर ऊपर

उठ जाए, तो आसमान

भी झुक जाता है और

ललकार यदि भर्ती हो तो

पाताल भी थर्हाता है।।१।।

सुरेंद्र हरड़े

नागपुर

चार पंक्तियां

तूने राम रहीम गौतम यीशु को जना है।

तेरे जैसा परोपकार कोई नहीं बना है।।

तेरे उपकार का मोल कोई चुका ना सके।

तूने हर रिश्ता प्यार के धागों से बुना है ।।

प्रा रविशंकर कोलते

नागपुर

 

*मैं सरस्वती मैं लक्ष्मी मैं ही अम्बा काली हूं*

*मैं ही भोर की कोलाहल मैं ही सांझ की लाली हूं*

*मैं त्याग मैं तपस्या मैं ही तो खुद्दारी हूँ*

*मैं गर्व मैं ही दर्प मैं समर्थ नारी हूं*

*मीना गोपाल त्रिपाठी*

सभी महान महिलाओं को शीश झुका वंदन है,

जिनके मस्तक पर मुकुटऔ’ चरणों में चन्दन है,

मेरी प्राणप्रिये,माँ बहन, बेटी,बहू ,नानी कुंदन हैं,

अंतर्राष्ट्रीयमहिलादिवस पे आपकाअभिनन्दन है।

रानी अग्रवाल,मुंबई।

हे! नारी तुम शक्ति हो

तुझमें है अग्नि शिखा

बुझने ना देना इस अग्नि शिखा क़ो

इसकी लौ क़ो ऊपर ही ऊपर रखना होगा

इस अग्नि शिखा क़ो जलना होगा

इस अग्नि शिखा क़ो जलना होगा

 

नीरजा ठाकुर नीर

पलावा मुंबई महाराष्ट्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button